
1. नए नियम के मुख्य प्रावधान
UGC के इन नए नियमों का प्राथमिक उद्देश्य एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को कैंपस में होने वाले भेदभाव से बचाना है
- Equal Opportunity Centre (EOC): अब हर विश्वविद्यालय और कॉलेज के लिए ‘समान अवसर केंद्र’ स्थापित करना अनिवार्य होगा।
- Equity Committee और Squad: संस्थानों को एक ‘इक्विटी कमेटी’ बनानी होगी जो हर 6 महीने में अपनी रिपोर्ट UGC को सौंपेगी। साथ ही कैंपस में निगरानी के लिए ‘इक्विटी स्क्वाड’ (Equity Squad) का गठन किया जाएगा।
- 24×7 हेल्पलाइन: किसी भी प्रकार के भेदभाव की शिकायत के लिए संस्थानों को 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करना होगा।
- सख्त कार्रवाई: यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो UGC उनकी मान्यता रद्द कर सकता है या मिलने वाली ग्रांट (अनुदान) रोक सकता है।
2. भेदभाव की नई परिभाषा
इस बार UGC ने भेदभाव की परिभाषा को विस्तार दिया है। इसमें केवल जाति ही नहीं, बल्कि धर्म, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता के आधार पर किए गए किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पक्षपात को शामिल किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहली बार OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से इन सुरक्षा नियमों के दायरे में लाया गया है।

3. विवाद की मुख्य वजह क्या है?
- दुरुपयोग की आशंका: आलोचकों का तर्क है कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा बहुत व्यापक और अस्पष्ट है। इससे सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज होने का डर है।
- एकतरफा नियम: विरोध करने वालों का कहना है कि नियम 3(c) के तहत सुरक्षा केवल विशिष्ट वर्गों (SC/ST/OBC) को दी गई है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
- कैंपस का माहौल: कुछ छात्रों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ के कारण कैंपस में हर समय निगरानी वाला माहौल रहेगा, जिससे छात्रों के बीच आपसी विश्वास कम हो सकता है।
4. ताजा अपडेट: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
विवाद बढ़ने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है। याचिकाओं में इन नियमों को असंवैधानिक बताया गया है। कोर्ट ने फिलहाल इन नियमों पर रोक (Stay) लगा दी है और केंद्र सरकार व UGC से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होनी तय है।
निष्कर्ष
UGC के नए नियम 2026 का उद्देश्य निसंदेह कैंपस को सुरक्षित और समान बनाना है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके और परिभाषाओं को लेकर जो आशंकाएं हैं, उन्हें दूर करना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या यह नियम वास्तव में समानता लाएंगे या विवाद की एक नई जड़ बनेंगे, यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।







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